देवजी, समर्पण कर चुके अन्य नक्सली केंद्र से भाकपा (माओवादी) पर लगा प्रतिबंध हटाने का आग्रह करेंगे
हैदराबाद, रविवार, 16 अगस्त 2026। आत्मसमर्पण कर चुके भाकपा (माओवादी) के वरिष्ठ नेता तिप्पिरी तिरुपति उर्फ देवजी ने कहा है कि वह केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से संगठन पर लगा प्रतिबंध हटाने का आग्रह करने की योजना बना रहे हैं, ताकि वह जनता से जुड़े मुद्दों को उठा सके। तिरुपति ने कहा कि वह और आत्मसमर्पण कर चुके उनके साथी कानूनी और खुले तौर पर जनता से जुड़े मुद्दों पर काम करना चाहते हैं। उन्होंने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, ‘‘हम (आत्मसमर्पण कर चुके नक्सली) भाकपा (माओवादी) पर लगा प्रतिबंध हटाने समेत विभिन्न मुद्दों को लेकर अमित शाह जी को एक आवेदन भेजने के बारे में सोच रहे हैं।’’
तिरुपति और आत्मसमर्पण कर चुके अन्य नेताओं ने हाल में तेलंगाना के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) सी. वी. आनंद से मुलाकात की थी और उनसे आग्रह किया था कि यदि वे ‘‘छोटी बैठकें’’ आयोजित करते हैं या मारे गए माओवादियों के परिजनों से मिलते हैं तो पुलिस उनकी गतिविधि पर प्रतिबंध न लगाए। उन्होंने कहा कि इस बात की आशंका है कि उन्हें संदेह की नजर से देखा जा सकता है, लेकिन वे किसी भी तरह की गैरकानूनी, गुप्त या सशस्त्र गतिविधि में शामिल नहीं होंगे। तिरुपति ने कहा कि वे बाद में जनता से जुड़े मुद्दों पर काम शुरू करना चाहेंगे क्योंकि फिलहाल वे ‘‘पुराने साथियों’’ से मुलाकात करने की प्रक्रिया में हैं। उन्होंने कहा कि उनकी मांग पर डीजीपी की प्रतिक्रिया सकारात्मक रही।
तिरुपति ने कहा कि प्रस्तावित कार्य संसदीय लोकतंत्र में किसी पारंपरिक राजनीतिक दल की तरह नहीं होगा। उनके अनुसार, जनता से जुड़े मुद्दों पर काम करने वाला कोई भी मंच राजनीतिक दल होता है। उन्होंने कहा कि यदि भाकपा (माओवादी) पर लगा प्रतिबंध हटा लिया जाता है तो वह और उनके साथी इसी संगठन के बैनर तले काम करना चाहेंगे, क्योंकि यह संगठन पहले से अस्तित्व में है। तिरुपति प्रतिबंधित संगठन के शीर्ष माओवादी कमांडर और प्रमुख रणनीतिकार रहे हैं। उन्होंने चार दशक से अधिक समय तक भूमिगत रहने के बाद इस साल फरवरी में तेलंगाना पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण किया था।
वह प्रतिबंधित संगठन की केंद्रीय समिति के सदस्य और पोलित ब्यूरो के सदस्य भी रहे हैं। उन्होंने केंद्रीय समिति के एक अन्य सदस्य मल्ला राजी रेड्डी के साथ आत्मसमर्पण किया था। तिरुपति ने उस समय कहा था कि स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के कारण उन्होंने आत्मसमर्पण करने का फैसला किया। उन्होंने ‘‘कानूनी दायरे’’ में रहते हुए अपना राजनीतिक जीवन जारी रखने का संकल्प लिया था। आत्मसमर्पण कर चुके माओवादियों की इस मांग पर कि केंद्र भाकपा (माओवादी) पर लगा प्रतिबंध हटा दे ताकि वे जनता के बीच काम कर सकें, तेलंगाना पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने इससे पहले कहा था कि यदि पूर्व सदस्य जनता के बीच काम करना चाहते हैं तो इसमें संगठन को शामिल करने की क्या जरूरत है। उन्होंने कहा था कि वे कानूनी दायरे में रहकर अपनी गतिविधियां चला सकते हैं।
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