नवीकरणीय ऊर्जा पारेषण के लिए पीएम-धारा योजना को मंजूरी, 1.86 लाख करोड़ रुपये होंगे खर्च
नई दिल्ली, बुधवार, 30 सितंबर 2026। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने बुधवार को 1.86 लाख करोड़ रुपये के व्यय वाली पीएम-धारा योजना को मंजूरी दे दी। इसके तहत 50 गीगावाट-घंटे की बैटरी भंडारण क्षमता के साथ राज्य के भीतर पारेषण प्रणाली विकसित की जाएगी, जिससे 135 गीगावाट तक की नवीकरणीय ऊर्जा को ग्रिड तक पहुंचाने में मदद मिलेगी। ‘प्रधानमंत्री-समन्वित एवं त्वरित नवीकरणीय ऊर्जा पहुंच विकास’ (पीएम-धार) योजना 2030 तक 500 गीगावाट नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता के महत्वाकांक्षी लक्ष्य को हासिल करने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में हुई मंत्रिमंडल की बैठक में इस योजना को मंजूरी दी गई।
आधिकारिक बयान के अनुसार, योजना के तहत भारत की राज्य के भीतर पारेषण प्रणाली को मजबूत किया जाएगा, जिससे राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 135 गीगावाट तक की नवीकरणीय ऊर्जा को ग्रिड और अंतत: उपभोक्ताओं तक पहुंचाया जा सकेगा। योजना में 50 गीगावाट-घंटा क्षमता की बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणाली लगाने का भी प्रावधान है। इसे नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादक के स्तर पर या ग्रिड में मजबूती के लिए महत्वपूर्ण स्थानों पर लगाया जा सकेगा। इससे नवीकरणीय ऊर्जा की अनियमित उपलब्धता और अधिक मांग वाले समय में बिजली कटौती जैसी समस्याओं से निपटने में मदद मिलेगी तथा गैर-सौर घंटों में बिजली की मांग पूरी की जा सकेगी।
योजना को वित्त वर्ष 2032-33 तक स्थापित करने का लक्ष्य है। इसके तहत कुल 1,86,405 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। इसमें राज्य के भीतर पारेषण प्रणाली के विकास के लिए 1,36,378 करोड़ रुपये और 50 गीगावाट-घंटे की बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणाली के लिए 50,000 करोड़ रुपये शामिल हैं।
योजना के लिए केंद्र सरकार कुल 54,082 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता देगी। यह सहायता राज्य के भीतर पारेषण शुल्क के बोझ को कम करने में मदद करेगी और इससे बिजली की लागत को नियंत्रित रखने में सहायता मिलेगी। इसका लाभ अंततः उपभोक्ताओं को मिलेगा। योजना के तहत पारेषण प्रणाली से जुड़ी सभी नई परियोजनाओं को शुल्क आधारित प्रतिस्पर्धी बोली प्रक्रिया के जरिये लागू किया जाएगा। मौजूदा परियोजनाओं को आधुनिक बनाने और नेटवर्क को मजबूत करने के काम लागत-आधारित व्यवस्था के तहत किए जाएंगे। राज्य पारेषण इकाइयां योजना की समग्र क्रियान्वयन एजेंसी होंगी। पारेषण सेवा प्रदाता नई परियोजनाओं में बनाओ, अपनाओ, संचालन और रखरखाव मॉडल (बीओओएम) के तहत भाग लेंगे।
सरकार ने कहा कि यह योजना 2035 तक 900 गीगावाट गैर-जीवाश्म ऊर्जा क्षमता स्थापित करने के लक्ष्य को हासिल करने में मदद करेगी। इससे देश की दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होगी और कार्बन उत्सर्जन घटाकर पर्यावरण अनुकूल विकास को बढ़ावा मिलेगा। योजना से बिजली क्षेत्र, विनिर्माण और निर्माण उद्योगों में प्रत्यक्ष तथा अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर सृजित होने की भी उम्मीद है। बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणाली के विनिर्माण और स्थापना से घरेलू ऊर्जा भंडारण उद्योग में रोजगार बढ़ेगा, जबकि संचालन, रखरखाव और ग्रिड प्रबंधन में दीर्घकालिक कुशल रोजगार के अवसर पैदा होंगे।
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