यादवपुर विश्वविद्यालय में झड़प: जांच समिति के प्रमुख ने इस्तीफा दिया
कोलकाता, सोमवार, 24 अगस्त 2026। यादवपुर विश्वविद्यालय परिसर में हाल में हुई हिंसा की घटना की जांच के लिए गठित पांच सदस्यीय समिति के प्रमुख प्रोफेसर शुभ शंकर सरकार ने प्रभावी तरीके से जांच करने में असमर्थता जताते हुए अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। विश्वविद्यालय के एक अधिकारी ने सोमवार को यह जानकारी दी। अधिकारी ने बताया कि विश्वविद्यालय जांच आगे बढ़ाने के लिए समिति का नया अध्यक्ष नियुक्त करेगा। यादवपुर विश्वविद्यालय के कार्यवाहक कुलसचिव सलीम बॉक्स मंडल ने कहा, ‘‘सरकार ने समिति की अध्यक्षता करने में असमर्थता जताई है। जल्द ही नया अध्यक्ष नियुक्त किया जाएगा।’’ सरकार ने यादवपुर विश्वविद्यालय के कुलपति चिरंजीब भट्टाचार्य को शनिवार को ईमेल के जरिये सूचित किया था कि वह यह जिम्मेदारी नहीं संभाल पाएंगे।
नेताजी सुभाष मुक्त विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति सरकार ने सोमवार को ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, ‘‘नियुक्ति की सूचना मिलने के तुरंत बाद मैंने यादवपुर विश्वविद्यालय के कुलपति को अपनी स्थिति से अवगत करा दिया था। मैं अभी दिल्ली में हूं और जांच के लिए घटना के समय परिसर में मौजूद लोगों से नियमित रूप से बातचीत करनी होगी।’’ सरकार ने कहा कि विश्वविद्यालय प्रशासन ने उन्हें जांच की कार्यवाही ऑनलाइन करने का सुझाव दिया था, लेकिन उनका मानना है कि ऐसी जांच डिजिटल माध्यम से बातचीत कर प्रभावी ढंग से नहीं की जा सकती।
यादवपुर विश्वविद्यालय में 20 अगस्त को अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) के कार्यकर्ताओं और वामपंथी छात्र संगठनों के सदस्यों के बीच झड़प हो गई थी और दोनों पक्षों ने एक-दूसरे पर परिसर में बाहरी लोगों को लाने का आरोप लगाया था। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) से संबद्ध एबीवीपी ने आरोप लगाया था कि स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (एसएफआई) और वामपंथी छात्र संगठनों के सदस्यों ने इंजीनियरिंग एवं प्रौद्योगिकी संकाय छात्र संघ (एफईटीएसयू) की बैठक की आड़ में टकराव शुरू किया। हालांकि, वामपंथी छात्र संगठनों ने एबीवीपी पर बाहरी लोगों को परिसर में लाने और तोड़फोड़ करने का आरोप लगाया।
इस बीच, आरएसएस से संबद्ध शिक्षकों के संगठन अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ ने यादवपुर विश्वविद्यालय के कुलपति को पत्र लिखकर सरकार की नियुक्ति का विरोध किया। शिक्षक संगठन ने जांच समिति का नेतृत्व करने के लिए सरकार के चयन पर सवाल उठाते हुए कहा कि भर्तियों में कथित अनियमितताओं को लेकर कलकत्ता उच्च न्यायालय में चली कार्यवाही के बाद उन्हें जनवरी 2022 में पश्चिम बंगाल स्कूल सेवा आयोग के अध्यक्ष पद से हटा दिया गया था। विश्वविद्यालय ने परिसर में कथित तोड़फोड़ के विरोध में छात्रों, शिक्षकों और आम नागरिकों के प्रदर्शन के बाद इस समिति के गठन की 21 अगस्त को घोषणा की थी।
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