महंगाई भत्ता मामला: अदालत ने पंजाब के मुख्य सचिव पर एक लाख रुपये का जुर्माना लगाया

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चंडीगढ़, बुधवार, 28 अक्टूबर 2026। पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय ने कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लंबित महंगाई भत्ते (डीए) से जुड़े एक मामले में अनुपालन रिपोर्ट दाखिल करने में विफल रहने पर पंजाब के मुख्य सचिव के ए पी सिन्हा पर एक लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। न्यायमूर्ति हर्ष बुंगर की पीठ ने मुख्य सचिव को राज्य सरकार के कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को महंगाई भत्ते के भुगतान के संबंध में अदालत के पहले के आदेशों के बारे में 30 अक्टूबर तक व्यक्तिगत हलफनामा दाखिल करने का निर्देश भी दिया। मुख्य सचिव को अगली सुनवाई की तारीख तीन नवंबर को अदालत में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित रहने का भी निर्देश दिया गया है।

ये निर्देश मंगलवार को कर्मचारियों और पेंशनभोगियों की ओर से दायर अवमानना याचिका पर दिए गए। याचिका में आरोप लगाया गया था कि राज्य सरकार ने तीन अगस्त के अदालत के आदेश का अनुपालन नहीं किया है। अदालत ने अपने आदेश में राज्य के कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को राज्य में तैनात अखिल भारतीय सेवा (आईएएस/आईपीएस/आईएफएस) के अधिकारियों को केंद्र सरकार के पैटर्न के अनुसार दिए जा रहे महंगाई भत्ते की दरों के अनुरूप महंगाई भत्ता और महंगाई राहत के बकाये का भुगतान करने का निर्देश दिया था। 

अदालत ने तब यह भी निर्देश दिया था कि जब तक सभी बकाये का भुगतान नहीं हो जाता, पंजाब सरकार प्रिंट और सोशल मीडिया में बड़े पैमाने पर विज्ञापन अभियान जैसे अनुत्पादक खर्च नहीं करेगी। अदालत ने यह भी निर्देश दिया था कि निर्धारित समयसीमा के भीतर भुगतान नहीं किए जाने पर बकाया राशि पर छह प्रतिशत सालाना की दर से साधारण ब्याज देना होगा। पंजाब सरकार ने उच्च न्यायालय के आदेश के खिलाफ एक सितंबर को उच्चतम न्यायालय में विशेष अनुमति याचिका (एसएलपी) दायर की थी। मंगलवार को सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं के वकील ने बताया कि पंजाब सरकार की ओर से दायर विशेष अनुमति याचिका में ‘‘खामियां’’ बताई गई हैं और उसे सुनवाई के लिए सूचीबद्ध नहीं किया गया है। राज्य सरकार के वकील ने मामले में स्थिति रिपोर्ट या अनुपालन रिपोर्ट दाखिल करने के लिए फिर से समय मांगा। इस पर अदालत ने कहा कि ऐसा अनुरोध पूरी तरह अनुचित है।

अदालत ने कहा, ‘‘उपर्युक्त तथ्य और परिस्थितियां स्पष्ट रूप से दर्शाती हैं कि प्रतिवादियों ने इस अदालत के निर्देशों का पालन करने के मामले में अवज्ञापूर्ण रवैया अपनाया है, जिसे कानूनन स्वीकार नहीं किया जा सकता।’’ अदालत ने कहा कि अवमानना याचिका को पहले 21 अगस्त को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया गया था। उस समय राज्य सरकार के वकील के अनुरोध पर स्थिति रिपोर्ट या अनुपालन रिपोर्ट दाखिल करने के लिए समय दिया गया था। अदालत ने कहा कि पर्याप्त समय दिए जाने के बाद भी अब तक ऐसी कोई रिपोर्ट रिकॉर्ड पर दाखिल नहीं की गई है। याचिकाकर्ताओं के वकील ने यह भी बताया कि उच्चतम न्यायालय में राज्य की अपील के संबंध में कथित तौर पर गलत हलफनामा दाखिल करने के मामले में मुख्य सचिव के खिलाफ आपराधिक अवमानना की कार्यवाही शुरू की गई है। यह मामला उच्च न्यायालय की खंडपीठ के समक्ष लंबित है।

अदालत ने पर्याप्त समय दिए जाने के बावजूद स्थिति रिपोर्ट या अनुपालन रिपोर्ट दाखिल नहीं करने पर मुख्य सचिव पर एक लाख रुपये का जुर्माना लगाते हुए उन्हें 30 अक्टूबर तक व्यक्तिगत हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया। यह राशि उच्च न्यायालय के वकील कल्याण कोष में जमा करानी होगी। इससे पहले, आठ अप्रैल को एकल पीठ ने कर्मचारियों के पक्ष में फैसला सुनाते हुए राज्य सरकार को 30 जून तक लंबित महंगाई भत्ते का भुगतान करने का निर्देश दिया था। राज्य सरकार द्वारा एकल पीठ के आदेश को चुनौती दिए जाने के बाद तीन अगस्त को खंडपीठ ने कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के पक्ष में फैसला सुनाया था। खंडपीठ ने राज्य सरकार को 18 अगस्त तक आदेश का पालन करने का निर्देश दिया था।

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