चुनाव आयोग ने बंगाल में 149 पुलिस अधिकारियों को चुनाव ड्यूटी से हटाया

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कोलकाता, शुक्रवार, 10 अप्रैल 2026। चुनाव आयोग ने विधानसभा चुनावों से पहले पश्चिम बंगाल पुलिस व्यवस्था में एक नये फेरबदल के तहत 81 पुलिस निरीक्षकों और 68 उप-निरीक्षकों को चुनाव संबंधी सभी कर्तव्यों से हटाने का आदेश दिया है। निर्वाचन निकाय ने स्पष्ट किया है कि ये अधिकारी अब प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से चुनावी प्रक्रिया के किसी भी पहलू से नहीं जुड़ेंगे। गुरुवार को जारी एक आधिकारिक अधिसूचना के अनुसार, हटाए गए निरीक्षकों को नई जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं और उन्हें शुक्रवार शाम 5 बजे तक अपने संबंधित पदों पर कार्यभार संभालना होगा।

आयोग ने संबंधित पुलिस अधीक्षकों को भी अनुपालन सुनिश्चित करने और लिखित  में अनुपालन पत्र जमा करने का निर्देश दिया है कि ये अधिकारी किसी भी तरह से चुनाव संबंधी कार्यों में हस्तक्षेप नहीं करेंगे। आयोग ने उप-निरीक्षकों से संबंधित एक अलग निर्देश में अपने पिछले 29 मार्च के आदेश का हवाला दिया, जब 150 निरीक्षकों और उप-निरीक्षकों को चुनाव ड्यूटी से हटाया गया था। उनमें से विभिन्न पुलिस थानों में कार्यरत 49 उप-निरीक्षकों को अब उनके वर्तमान जिलों से बाहर स्थानांतरित करने का निर्देश दिया गया है। आयोग ने दोहराया कि उन्हें चुनाव संबंधी किसी भी जिम्मेदारी से पूरी तरह अलग रहना चाहिये।

इसके अतिरिक्त, एक अन्य अधिसूचना के तहत अन्य 19 उप-निरीक्षकों को विशेष रूप से चुनाव ड्यूटी से हटाने का आदेश दिया गया है। हटाये गये निरीक्षकों की सूची राज्य के कई जिलों में फैली हुई है, जिनमें कूचबिहार, रायगंज, इस्लामपुर, अलीपुरद्वार, दक्षिण दिनाजपुर, सिलीगुड़ी, डायमंड हार्बर, बरुईपुर, बारासात, बशीरहाट, बनगाँव, बैरकपुर, बिधाननगर, कृष्णानगर, राणाघाट, आसनसोल-दुर्गापुर, पश्चिम मेदिनीपुर, पूर्व मेदिनीपुर, पुरुलिया, बीरभूम, जलपाईगुड़ी, मालदा और बांकुरा शामिल हैं, जो एक व्यापक प्रशासनिक हस्तक्षेप का संकेत देते हैं। पश्चिम बंगाल की सभी 294 विधानसभा सीटों के लिए 23 अप्रैल और 29 अप्रैल को दो चरणों में मतदान होना है। चुनाव की घोषणा के बाद से, राज्य प्रशासन चुनाव आयोग के नियंत्रण में है, जिसने प्रशासनिक और पुलिस तंत्र में व्यापक बदलाव किये हैं।

मुख्य सचिव, पुलिस महानिदेशक और पुलिस आयुक्त सहित प्रमुख पदों पर पहले ही फेरबदल किया जा चुका है। सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस ने आयोग के आक्रामक प्रशासनिक उपायों पर कड़ी आपत्ति व्यक्त की है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने सार्वजनिक रैलियों में बार-बार निर्वाचन निकाय की आलोचना की है, उसके निर्णयों पर सवाल उठाए हैं और विशेष रूप से अधिकारियों के स्थानांतरण को लेकर अति-सक्रियता का आरोप लगाया है। इस बीच, कोलकाता के पूर्व पुलिस आयुक्त सुप्रतिम सरकार को चुनाव ड्यूटी से राहत नहीं दी गई है। स्वास्थ्य संबंधी चिंताओं का हवाला देने और तमिलनाडु में अपनी नियुक्ति से छूट मांगने के बावजूद, आयोग के सूत्रों ने पुष्टि की कि उन्हें दक्षिणी राज्य में चुनाव ड्यूटी के लिये पर्यवेक्षक के रूप में जाना ही होगा।

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