नीट प्रश्नपत्र लीक: अदालत ने ‘लाई-डिटेक्टर टेस्ट’ कराने की तीन आरोपियों की याचिका खारिज की
नई दिल्ली, सोमवार, 10 अगस्त 2026। राष्ट्रीय पात्रता प्रवेश परीक्षा (नीट) प्रश्नपत्र लीक मामले की सुनवाई कर रही दिल्ली की एक विशेष त्वरित अदालत ने सोमवार को तीन आरोपियों की एक याचिका खारिज कर दी, जिसमें उन्होंने अपनी इच्छा से ‘लाई डिटेक्टर टेस्ट’ और ‘ब्रेन मैपिंग’ कराने का अनुरोध किया था। विशेष न्यायाधीश अजय गुप्ता ने तीन आरोपियों मंगल लाल बीवाल, दिनेश बीवाल और विकास बीवाल की याचिका खारिज कर दी। उन्होंने पॉलीग्राफ (लाई डिटेक्टर) टेस्ट और ‘ब्रेन इलेक्ट्रिकल एक्टिवेशन प्रोफाइल’ (बीईएपी) जांच कराने की अनुमति मांगी थी। बीईएपी को ब्रेन मैपिंग भी कहा जाता है।
लाई-डिटेक्टर टेस्ट के जरिये यह पता लगाने की कोशिश की जाती है कि कोई व्यक्ति सच बोल रहा है या झूठ। ब्रेन मैपिंग में यह देखा जाता है कि कोई खास जानकारी सामने आने पर व्यक्ति के दिमाग में कोई खास प्रतिक्रिया होती है या नहीं। याचिका में अदालत से इन जांच के लिए अनुमति मांगी गई थी। याचिका में कहा गया है कि आरोपी “अपनी ईमानदारी साबित करना” चाहते हैं और “निष्पक्ष व पारदर्शी जांच” के लिए एजेंसी की मदद करना चाहते हैं। आदेश की विस्तृत जानकारी अभी उपलब्ध नहीं हुई है। इस बीच, अदालत ने मामले में 13 आरोपियों के खिलाफ सीबीआई के आरोपपत्र पर संज्ञान लेने पर फैसला 12 अगस्त तक के लिए टाल दिया।
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